नवंबर (कार्तिक – मार्गशीर्ष) माह के प्रमुख कृषि कार्य (Agricultural work in November Month):

नवंबर का महीना किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस समय खरीफ की कटाई लगभग पूरी हो जाती है और रबी की बुआई की जाती है।

❄️ मौसम की अनुकूलता

  • ठंड के मौसम की शुरुआत के साथ मृदा में पर्याप्त नमी रहती है, जो गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों, मसूर इत्यादि रबी फसलों की बुआई के लिए अनुकूल होती है।
  • नवंबर में मौसम में ठंडक और नमी की उपस्थिति फसलों की वृद्धि तथा अंकुरण के लिए अनुकूल रहती है।

🧑‍🌾 मुख्य कृषि गतिविधियाँ

इस माह में किसान निम्नलिखित कार्यों पर विशेष ध्यान देते हैं:

  • समन्वय: विभिन्न कृषि कार्यों के संयोजन पर ध्यान देना।
  • खेत की तैयारी: पिछली खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेत की जुताई करना।
  • बुआई: विभिन्न रबी फसलों की बुआई करना।
  • पोषक तत्व: खाद एवं उर्वरकों का सही समय पर प्रयोग करना।
  • जल प्रबंधन: मृदा में नमी बनाए रखना और पहली सिंचाई के उचित समय का निर्धारण करना।
  • सब्जी एवं फल: फलों और सब्जियों की नई फसलों को लगाना।

फसल उत्पादन (Crop Production):

🌾 गेहूं की खेती (Wheat Farming):

नवंबर का महीना गेहूं की बुआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। फसल की सफलता उन्नत बीजों के चयन और सही प्रबंधन पर निर्भर करती है।

1. बुआई का सही समय

क्षेत्र/दशाउपयुक्त समय
उत्तरी-पश्चिमी मैदानी (सिंचित)नवंबर का प्रथम पखवाड़ा
उत्तरी-पूर्वी भागों (सिंचित)मध्य नवंबर तक पूरी करें
बारानी क्षेत्र (वर्षा आधारित)अक्टूबर का अंतिम सप्ताह से नवंबर का प्रथम सप्ताह तक
बारानी क्षेत्र (अधिक नमी होने पर)15 नवंबर तक

2. भूमि का चयन व तैयारी

  • उपयुक्त भूमि: अधिक जल धारण क्षमता वाली दोमट, बलुई दोमट और मटियार दोमट भूमि (pH 7-7.5)।
  • जुताई: पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से, इसके बाद 3-4 जुताइयां कल्टीवेटर से करें और फिर पाटा लगाकर खेत को समतल करें।
  • नमी प्रबंधन: बुआई के समय मिट्टी में उपयुक्त नमी होना आवश्यक है। यदि नमी कम हो तो बुआई से पहले पलेवा (प्री-सोइंग इरिगेशन) अवश्य करें।

3. बीज दर और बीजोपचार

दशाबीज दर (कि.ग्रा./हैक्टर)पंक्तियों की दूरी (सें.मी.)बुआई की गहराई (सें.मी.)
सिंचित एवं समय से बुआई10022.55
सिंचित एवं देरी से बुआई12515-185
बारानी क्षेत्र7522.55
लवणीय/क्षारीय मृदा12515-185

बीजोपचार (Seed Treatment):

  • कवकजनित रोग: 2.0 ग्रा. वीटावैक्स, या 2.5 ग्रा. कार्बण्डाजिम, या 2.0 ग्रा. थीरम, या 2.5 ग्रा. मैंकोजेब प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें।
  • ईयर कॉकल/कंडुआ: रोगग्रस्त बीजों को 20% नमक के घोल में डुबोकर, नीचे बचे स्वस्थ बीज को धोकर सुखाएँ।
  • दीमक नियंत्रण: 600 मि.ली. क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी. को पानी में घोलकर 100 कि.ग्रा. बीजों पर छिड़ककर उपचारित करें।

बुआई की विधि: सीडड्रिल सबसे लोकप्रिय है। अब जीरो टिलेज, फर्टी-सीडड्रिल, फर्ब ड्रिल और हैपी सीडर जैसी मशीनें भी प्रयोग की जा रही हैं।

4. खाद एवं उर्वरकों का सही प्रयोग

उर्वरक का प्रयोग हमेशा मृदा परीक्षण के आधार पर करें।

दशानाइट्रोजन (N)फॉस्फोरस (P)पोटाश (K)
सिंचित एवं समय से (कि.ग्रा./है.)1506050
सिंचित एवं देर से (कि.ग्रा./है.)1206050
वर्षा आधारित (कि.ग्रा./है.)603020
  • गोबर की खाद: 10 टन प्रति हैक्टर बुआई से एक माह पहले डालें।
  • जिंक की कमी: बुआई के समय 25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट प्रति हैक्टर डालें। यदि कमी दिखे तो 0.5% जिंक सल्फेट का छिड़काव करें।
  • गंधक की कमी: अमोनियम सल्फेट या सिंगल सुपर फॉस्फेट का प्रयोग करें।

5. खरपतवार नियंत्रण

  • प्रकार: संकरी पत्ती वाले (मोथा, गुल्ली डण्डा) और चौड़ी पत्ती वाले (बथुआ, हिरनखुरी) खरपतवार पाए जाते हैं।
  • नियंत्रण: खरपतवारनाशी रसायनों का उचित सांद्रता, विधि और समय पर प्रयोग करें ताकि लागत और समय की बचत हो।

6. जल प्रबंधन

  • सिंचाई की आवश्यकता: अच्छे उत्पादन के लिए 4-6 सिंचाइयों की आवश्यकता पड़ती है। पानी की उपलब्धता के अनुसार सिंचाई का समय निर्धारित करें।

गेहूं की अच्छी उपज के लिए उन्नत प्रजातियों का चयन और समय पर किए गए ये सभी कृषि कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं!

🌾 जौ (Barley) की खेती

जौ रबी मौसम की एक महत्वपूर्ण फसल है, जिसकी बुआई नवंबर माह में करना अत्यंत आवश्यक है। उचित समय पर बुआई, सही किस्मों का चयन और प्रभावी जल प्रबंधन जौ की बंपर पैदावार सुनिश्चित करता है।

1. बुआई का समय और विधि

जौ की बुआई का उपयुक्त समय अक्टूबर से दिसंबर तक होता है, लेकिन नवंबर के दौरान की गई बुआई बेहतर मानी जाती है।

क्षेत्रबुआई का उपयुक्त समय
असिंचित क्षेत्र20 अक्टूबर से 10 नवंबर तक
सिंचित क्षेत्र25 नवंबर तक पूरी कर लें
पछेती बुआई15 दिसंबर तक
  • बीज दर: प्रति हेक्टेयर 75 कि.ग्रा. बीज का प्रयोग करें।
  • बुआई की विधि: हल के पीछे कूड़ों में या सीड ड्रिल से बुआई करें।
  • दूरी और गहराई: पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सें.मी. और बीज की गहराई 5-6 सें.मी. रखें।

बीजोपचार

यदि बीज प्रमाणित न हो, तो बुआई से पहले 1.0 कि.ग्रा. बीज को 2 ग्राम थीरम या 2.5 ग्राम कार्बण्डाजिम नामक दवा से उपचारित करें।

2. किस्मों का चयन और पोषण प्रबंधन

  • किस्मों का चयन:
    • बुआई के लिए उपयोग किया जाने वाला बीज रोगमुक्त, प्रमाणित और क्षेत्र विशेष के लिए संस्तुत होना चाहिए।
    • बीजों में किसी दूसरी किस्म के बीज नहीं मिले होने चाहिए, और बुआई से पहले अंकुरण का परीक्षण ज़रूर करें।
  • पोषक तत्व प्रबंधन
    • जौ की फसल में प्रति हेक्टेयर निम्नलिखित उर्वरक की मात्रा डालें:
      • नाइट्रोजन: 60 कि.ग्रा.
      • फॉस्फोरस: 30 कि.ग्रा.
      • पोटेशियम (पोटाश): 15 कि.ग्रा.
पोषक तत्वमात्राकब प्रयोग करें
फॉस्फोरस और पोटाशपूरी मात्राबुआई के समय (मूल रूप में)
नाइट्रोजनआधी-आधी मात्राबुआई के समय और पहली सिंचाई से पहले

3. जल और खरपतवार प्रबंधन

  • जल प्रबंधन
    • जौ की सफल खेती के लिए 2-3 सिंचाइयों की आवश्यकता पड़ती है।
सिंचाई की सुविधासिंचाई का समय
एक सिंचाईबुआई के 30-35 दिनों बाद
दो सिंचाईपहली: बुआई के 25-30 दिनों बाद और दूसरी: बुआई के 65-70 दिनों बाद
लवणीय/क्षारीय मृदाज्यादा गहरी और कम सिंचाई के बजाय, अधिक संख्या में हल्की सिंचाई देना उत्तम है।
  • खरपतवार प्रबंधन:
    • खेत में खरपतवारों की मात्रा अधिक होने पर, शाकनाशी रसायनों का प्रयोग सावधानी पूर्वक करें।

🌽 शीतकालीन (रबी) मक्का की खेती

नवंबर का महीना रबी मक्का की बुआई के लिए उपयुक्त होता है। इस समय सही किस्मों का चयन और उचित प्रबंधन अच्छी उपज के लिए महत्वपूर्ण है।

1. भूमि का चयन तथा तैयारी

  • उपयुक्त मृदा: दोमट मृदा रबी मक्का की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है।
  • जुताई: मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए सामान्यतः 1-2 जुताई मिट्टी पलटने वाले हल या डिस्क हैरो से करें।
  • नमी प्रबंधन: यदि खेत में नमी की कमी हो, तो बुआई से पहले पलेवा (सिंचाई) करके खेत की तैयारी कर लें।

2. किस्मों का चयन

रबी मक्का की बुआई के लिए ठंड/पाला सहने वाली किस्में चुनें:

  • संस्तुत उन्नत प्रजातियाँ:
    • संकर मक्का: एच.क्यू.पी.एम.-1
    • मीठी मक्का (स्वीटकॉर्न): प्रिया स्वीटकॉर्न, माधुरी स्वीटकॉर्न (हरे भुट्टे हेतु)
    • चारा हेतु मक्का: अफ्रीकन टॉल, जे.-1006
  • ठंड/पाला सहनशील प्रजातियाँ: जीके 3150 हाइब्रिड एवं शालीमार मक्का हाइब्रिड 4

3. बुआई का समय, बीज दर एवं विधि

  • बुआई का उपयुक्त समय: 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक
  • बीज दर: 20-22 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर का प्रयोग करें, जिससे लगभग 85-90 हजार पौधे प्रति हैक्टर प्राप्त हो सकें।
  • दूरी:
    • पंक्ति से पंक्ति की दूरी: 60 सें.मी.
    • पौधे से पौधे की दूरी: 20-25 सें.मी.
  • बीज शोधन (Seed Treatment): बीजजनित रोगों से बचाव के लिए, 1 कि.ग्रा. बीज को 2 ग्राम कार्बण्डाजिम (50%) या 2.5 ग्राम थीरम की मात्रा से शोधित करके ही बोएँ।

4. पोषक तत्व प्रबंधन (कि.ग्रा./हैक्टर)

उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए।

प्रकारनाइट्रोजन (N)फॉस्फोरस (P)पोटाश (K)सल्फर (S)जिंक सल्फेट (Zn)
संकर मक्का15075604025
संकुल मक्का12060403025
  • जिंक की कमी होने पर: बुआई से पहले 25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट भूमि में अवश्य मिलाएँ।
  • यूरिया टॉप ड्रेसिंग: पौधे के लगभग घुटने तक की ऊँचाई के होने पर या बुआई के लगभग 30-35 दिनों बाद यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करें।

5. खरपतवार नियंत्रण

  • यांत्रिक विधि: खरपतवार नियंत्रण के लिए 3-4 बार निराई-गुड़ाई की आवश्यकता होती है।
    • पहली निराई-गुड़ाई बुआई के 20-25 दिनों बाद करें।
    • निराई-गुड़ाई की गहराई 4-5 सें.मी. से अधिक नहीं होनी चाहिए, ताकि पौधों की जड़ों को नुकसान न पहुँचे।
    • खेत में खरपतवार के उगने के समय ही उखाड़ देना सबसे अच्छा उपचार है।
  • रासायनिक विधि: खरपतवारनाशी दवाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।

🌱 चना (Chana/Chickpea) की खेती: नवंबर में पछेती बुआई और उन्नत प्रबंधन

नवंबर का महीना उन किसानों के लिए चने की बुआई का अंतिम और महत्वपूर्ण समय है, जिनकी कटाई धान, मक्का या कपास जैसी खरीफ फसलों की देरी से हुई है। सही समय पर बुआई, बीजोपचार और उचित गहराई चने की सफल पैदावार की कुंजी है।

1. बुआई का समय और किस्मों का चयन

बुआई का समय

  • सिंचाई के साधन उपलब्ध होने पर, चने की बुआई नवंबर के अंत तक या दिसंबर के पहले सप्ताह तक कर सकते हैं।
  • उकठा रोग (Wilt) प्रभावित क्षेत्रों में बुआई देरी से करना अधिक लाभदायक रहता है।

उन्नत किस्में (पछेती बुआई के लिए)

प्रकारकिस्मेंविशेषताएँ
देसी (पछेती)पूसा चना विजय, एच.सी-5, जे.जी-12पछेती बुआई के लिए उपयुक्त।
काबुली (पछेती)पूसा 1003, राज विजय काबुली 101, जी.एन.जी. 1292काबुली चने की पछेती किस्में।
जलवायु सहिष्णुपूसा 3043, पूसा चना 10216, सुपर एनिगेरी-1सूखा/कम वर्षा और नमी तनाव सहनशील।
बायो-फोर्टिफाइडआईपीसी 2005-62, शालीमार चना-2उच्च प्रोटीन (27% से अधिक)।

2. बुआई की विधि, बीज उपचार और गहराई

बुआई की गहराई

चने के बीजों की बुआई गहराई में करनी चाहिए ताकि जड़ों को कम पानी में भी नमी मिलती रहे।

  • सिंचित क्षेत्र: 5-7 सें.मी.
  • बारानी क्षेत्र (संरक्षित नमी): 7-10 सें.मी.
  • दूरी: पछेती बुआई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 22.5 सें.मी रखें।

बीजोपचार (Seed Treatment)

अच्छा अंकुरण और स्वस्थ पौधे प्राप्त करने के लिए बीजोपचार अनिवार्य है:

  1. कवकनाशी: 1 ग्राम बाविस्टीन या 5-10 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से शोधन करें।
  2. राइजोबियम टीका: प्रति हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए दो पैकेट राइजोबियम टीका से उपचारित करना अति आवश्यक है।
  3. समय: बीज उपचार 10-12 घंटे पहले कर लेना चाहिए। इससे पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
  4. फॉस्फेट घुलनशील बैक्टीरिया: अनुपलब्ध फॉस्फेट को उपलब्ध कराने में मदद के लिए इस टीके का प्रयोग सहायक होता है।

3. उर्वरक, जल प्रबंधन और निपिंग (निराई)

उर्वरकों की मात्रा एवं प्रयोग (प्रति हैक्टर)

  • नाइट्रोजन: 20 कि.ग्रा.
  • फॉस्फोरस: 50 कि.ग्रा.
  • गंधक की कमी होने पर: 20 कि.ग्रा. गंधक
  • जस्ते की कमी होने पर: 25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट

ध्यान दें: सभी उर्वरकों का उपयोग बुआई के समय ही करें।

जल प्रबंधन और निराई-गुड़ाई

  • सिंचाई: यदि सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो और जाड़े में वर्षा न हो, तो बुआई के 45 दिनों बाद और 75 दिनों बाद सिंचाई करना लाभदायक होता है।
  • निराई-गुड़ाई: बुआई के 30-35 दिनों के बाद निराई-गुड़ाई अवश्य कर लें।

कलिका तुड़ाई (Nipping)

  • फसल के 35-40 दिनों बाद, मुख्य कलिकाओं को ऊपर से अवश्य तोड़ें (Nipping)।
  • यह प्रक्रिया नीचे से नई कलिकाओं को निकलने के लिए प्रेरित करती है, जिससे प्रति पौधा अधिक शाखाएँ मिलती हैं और पैदावार बढ़ती है

🟢 मटर (Pea) की सफल खेती: नवंबर में बुआई और प्रबंधन

मटर रबी की एक प्रमुख दलहनी फसल है, जिसकी बुआई नवंबर माह में करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सही समय पर बुआई न करने से ‘फलीबेधक’ कीट का प्रकोप बढ़ सकता है, जिससे उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

1. बुआई का समय, विधि और बीज दर

बुआई का उपयुक्त समय

  • मटर की बुआई का उपयुक्त समय अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के मध्य तक होता है।

बीज दर

  • एक हेक्टेयर भूमि में बुआई के लिए 90-100 कि.ग्रा. बीज का प्रयोग करें।

बुआई की दूरी और गहराई

किस्मपंक्ति × पौधे की दूरीबुआई की गहराई
अगेती किस्में30 x 5 सें.मी.2-3 सें.मी.
पछेती किस्में45-60 x 10 सें.मी.2-3 सें.मी.

2. किस्मों का चयन और बीजोपचार

उन्नत किस्में (क्षेत्रानुसार)

क्षेत्रउन्नत प्रजातियाँ
उत्तर-पूर्वी मैदानीआईपीएफडी 12-8 (आकाश), आईपीएफडी 13-2 (अनंत), लवीय मटर 2
उत्तर-पश्चिमी मैदानीपंत मटर 250, एचएफपी 1428, कोटा मटर 1, पंत मटर-5
मध्य क्षेत्रजे.पी. 885, केपीएमआर 144-1, अंबिका, केपीएमआर 400
पर्वतीय क्षेत्रमालवीय मटर 15, आईएफपीडी 1-10, पंत मटर 42, एचएफपी 9426
  • बायो-फोर्टिफाइड: अर्पण (आईपीएफडी 19-3) (प्रोटीन 20-22%, आयरन 91.5 PPM, जिंक 50.5 PPM से भरपूर)।

बीजोपचार (Seed Treatment)

  • कवकनाशी: बीजजनित रोग से बचाव के लिए, 2.5 ग्राम कार्बण्डाजिम या थीरम या कैप्टॉन प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करके बोना लाभदायक रहता है।
  • राइजोबियम कल्चर: उचित राइजोबियम कल्चर का टीकाकरण जड़ों में ग्रन्थियों के विकास और नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होता है।

3. खरपतवार नियंत्रण

खरपतवार नियंत्रण के लिए यांत्रिक और रासायनिक दोनों विधियाँ प्रभावी हैं।

यांत्रिक नियंत्रण (निराई-गुड़ाई)

  • पौधों की पंक्तियों में उचित दूरी खरपतवार की समस्या को कम करती है।
  • फसल में एक या दो निराई-गुड़ाई पर्याप्त होती है:
    • पहली निराई-गुड़ाई: बुआई के 20-25 दिनों बाद, प्रथम सिंचाई के पूर्व।
    • दूसरी निराई-गुड़ाई: बुआई के 40-45 दिनों बाद, सिंचाई के उपरांत ओट आने पर।

रासायनिक नियंत्रण (शाकनाशी)

  • बुआई से पहले: फ्लूक्लोरोलिन 45 ई.सी. की 2.2 लीटर मात्रा (800-1000 लीटर पानी/हैक्टर) में घोलकर बुआई के तुरन्त पहले मिट्टी में मिलाना चाहिए।
  • बुआई के 2-3 दिनों के भीतर: एलाक्लोर 50% ई.सी. की 4.0 लीटर मात्रा (800-1000 लीटर पानी/हैक्टर) में घोलकर फ्लैट फैन नॉजिल से समान रूप से छिड़काव करें।
  • एक अन्य विकल्प: बासालिन 0.75-1.0 कि.ग्रा./हैक्टर को बुआई से पहले 800-1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना भी लाभप्रद है।

🤎 मसूर (Lentil) की सफल खेती: नवंबर में बुआई और प्रबंधन

मसूर रबी मौसम की एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है, जिसे अक्सर धान के बाद खाली खेतों में उगाया जाता है। नवंबर का दूसरा पखवाड़ा इसकी बुआई के लिए उपयुक्त समय होता है। सही बीज दर, प्रभावी बीजोपचार और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन मसूर की अच्छी उपज सुनिश्चित करते हैं।

1. बुआई का समय, बीज दर और विधि

बुआई का समय

  • उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र तथा मध्य क्षेत्र में नवंबर का दूसरा पखवाड़ा (मध्य नवंबर से अंत तक) बुआई का उचित समय है।

बीज दर (प्रति हैक्टर)

  • बड़े दाने वाली प्रजातियाँ: 55-60 कि.ग्रा. / हैक्टर
  • छोटे दानों वाली प्रजातियाँ: 40-45 कि.ग्रा. / हैक्टर

बुआई की दूरी

  • सामान्य बुआई: पंक्तियों में 20-25 सें.मी. की दूरी रखें।
  • पछेती बुआई: यह दूरी घटाकर 15 सें.मी. कर देनी चाहिए।

बीजोपचार (Seed Treatment)

  • बीजजनित रोगों से बचाव के लिए, बुआई से पूर्व 2.5 ग्राम थीरम या 3.0 ग्राम जिंक मैग्नीज कार्बोनेट प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से शोधित कर लेना चाहिए।

2. मसूर की उन्नत किस्में

अपने क्षेत्र और जलवायु की चुनौतियों के अनुसार सही किस्म का चयन करें:

विशेषताउन्नत प्रजातियाँ
सामान्य (उत्तर-पूर्वी/मध्य क्षेत्र)एल-4717 (पूसा अगेती मसूर), एल-4729, पीएसएल-9, वीएल मसूर 148, छत्तीसगढ़ मसूर-1, पूसा वैभव (एल 4147)।
जलवायु सहिष्णु (सूखा/कम वर्षा)कोटा मसूर 2 (आरकेएल 14-20), कोटा मसूर 3 (आरकेएल 605-03)।
लवणता/क्षारीयता सहनशीलपीएसएल-9, पीडीएल-1, पूसा श्वेता पीएसएल-19।
गर्मी/उच्च तापमान सहनशीलकोटा मसूर 2, कोटा मसूर 3, बिधान दाल 16।
ठंड/पाला सहनशीलशालीमार मसूर 3।
बायो-फोर्टिफाइड (उच्च पोषण)पूसा अगेती मसूर आयरन 65.0 PPM, आईपीएल 220 (आयरन 73.0PPM और जिंक 51.0 PPM)।

3. पोषक तत्व प्रबंधन (प्रति हैक्टर)

उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना सर्वोत्तम रहता है।

  • नाइट्रोजन (N): 15-20 कि.ग्रा.
  • फॉस्फेट (P): 50-60 कि.ग्रा.
    • वैकल्पिक: यदि डीएपी उपलब्ध है, तो इसकी 100 कि.ग्रा. मात्रा का प्रयोग करें।
  • गंधक (S): 20 कि.ग्रा. गंधक तत्व का प्रयोग करें (आवश्यकतानुसार)।
  • जिंक (Zn): यदि जिंक की कमी हो, तो खेत की अंतिम तैयारी से पहले 25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट खेत में अच्छी तरह मिला दें।

उर्वरक प्रयोग का तरीका: समस्त उर्वरक अंतिम जुताई के समय हल के पीछे कूड़ में बीज की सतह से 2 सें.मी. गहराई एवं 5 सें.मी. साइड में देना सर्वोत्तम रहता है।

4. खरपतवार नियंत्रण

  • यांत्रिक नियंत्रण: बुआई के 25-30 दिनों बाद एक निराई-गुड़ाई अवश्य कर दें।
  • रासायनिक नियंत्रण:
    • बुआई से पहले: 2.2लीटर फ्लूक्लोरोलिन 45 ई.सी. / हैक्टर (800-1000 लीटर पानी में घोलकर) बुआई के तुरंत पहले मिट्टी में मिला दें
    • या
    • बुआई के 2-3 दिनों के अंदर: 4.0 लीटर एलाक्लोर 50 प्रतिशत ई.सी. / हैक्टर (800-1000 लीटर पानी में घोलकर) फ्लैट फैन नॉजिल से छिड़काव करें।

🌻 लाही, राई और सरसों की खेती: नवंबर में पछेती बुआई और प्रबंधन

लाही, राई और सरसों तिलहनी फसलों में प्रमुख हैं। नवंबर का महीना सिंचित क्षेत्रों में इनकी पछेती बुआई के लिए महत्वपूर्ण है। सही समय पर थिनिंग, पोषण और कीट नियंत्रण इन फसलों की पैदावार को 20-25% तक बढ़ा सकता है।

1. बुआई का समय और किस्मों का चयन

बुआई का समय

  • सामान्य बुआई: अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक पूरी कर लेनी चाहिए।
  • सिंचित पछेती बुआई: 15 नवंबर तक की जा सकती है।

उन्नत किस्में (जलवायु और मिट्टी के आधार पर)

विशेषताप्रमुख उन्नत प्रजातियाँ
सिंचित पछेती बुआईपूसा सरसों 32, पूसा डबल जीरो सरसों 33 (कम इरुसिक एसिड और ग्लूकोसाइनोलेट)
बारानी क्षेत्रआरबी 50, आरजीएन 48, गीता अरावली, पी.बी.आर. 97
क्षारीय/लवणीय भूमिसी.एस. 52, सी.एस. 54, सी.एस. 56, जेके समृद्धि गोल्ड (जेकेएमएस 2), सी.एस. 58, सी.एस. 60, सी.एस. 61, सी.एस. 62, सी.एस. 64
सूखा/नमी तनाव सहिष्णुआरजीएन-298, जीएम-3, डीआरएमआर 1165-40
बायो-फोर्टिफाइडपूसा डबल जीरो सरसों 31 (देश की पहली कैनोला गुणवत्ता वाली किस्म), पूसा सरसों 30, पूसा सरसों 32, पूसा सरसों 34 (सभी में कम इरुसिक एसिड)

2. थिनिंग (विरलीकरण) और पोषण प्रबंधन

थिनिंग

  • राई की फसल में बुआई के 15-20 दिनों के बाद घने पौधों को निकाल दें।
  • पौधों की आपस की दूरी 10-15 सें.मी. कर लें।
  • पहली सिंचाई से पहले भी पौधों की छंटाई (थिनिंग) अवश्य कर लें।

जल एवं पोषण प्रबंधन

  • पहली सिंचाई: बुआई के 30-35 दिनों के बाद करें।
  • नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग: पहली सिंचाई के बाद ओट आने पर प्रति हेक्टेयर 75 कि.ग्रा. नाइट्रोजन का छिड़काव करें।

3. खरपतवार और रोग नियंत्रण

खरपतवार नियंत्रण

  • बुआई के लगभग 25 से 30 दिनों बाद निराई-गुड़ाई करें।
  • निराई-गुड़ाई से पौधों की सांस लेने की क्षमता बढ़ती है और उनका विकास तेज़ होता है।
  • खरपतवार बढ़ने से लाही की उपज में 20-25% की कमी आ सकती है।
  • रासायनिक नियंत्रण: इसके लिए फ्लुक्लोरेलिन (45 ईसी) का घोल मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।

पौध संरक्षण (आरा मक्खी)

  • पहचान: आरा मक्खी की सुंडियां काले स्लेटी रंग की होती हैं। ये पत्तियों को किनारे से या छेद बनाती हुई तेज़ी से खाती हैं, जिससे पौधा पत्ती विहीन हो सकता है।
  • जैव-नियंत्रण:
    • 5 फेरोमोन ट्रैप (गंधपाश) प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।
    • बैसिलस थुरिंजिएन्सिस 1.0 कि.ग्रा./हैक्टर (400-500 लीटर पानी में) का छिड़काव शाम के समय, 15 दिनों के अंतराल पर करें।
  • रासायनिक नियंत्रण:
    • मैलाथियॉन 5% धूल 20-25 कि.ग्रा./हैक्टर का बुरकाव करें।
    • या, मैलाथियॉन 50% ई.सी. 1.5 लीटर या क्विनालफॉस 25% ई.सी. 1.25 लीटर/हैक्टर (600-700 लीटर पानी में) का घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • रोग नियंत्रण: पौधों को झुलसाने वाले रोगों और सफेद गेरू से बचाने के लिए, पर्याप्त पानी में 2 कि.ग्रा. जिंक मैग्नीज कार्बामेट 75% दवा का छिड़काव करें।

🌿 शरदकालीन गन्ना (Autumn Sugarcane) की खेती: नवंबर में रोपण और प्रबंधन

नवंबर का महीना शरदकालीन गन्ने की बुआई और प्रबंधन के लिए निर्णायक है। इस समय की गई बुआई और उचित देखभाल से गन्ने का अंकुरण अच्छा होता है और उपज में वृद्धि होती है।

1. बुआई का समय और जल प्रबंधन

  • बुआई का समय: शीतकालीन गन्ने की बुआई 15 नवंबर से पहले अवश्य पूरी कर लें। इसके बाद तापमान में कमी से गन्ने का अंकुरण अच्छा नहीं होता है।
  • सिंचाई: फसल की अच्छी बढ़वार के लिए 12-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।
  • निराई-गुड़ाई: बुआई के 25-30 दिनों बाद निराई-गुड़ाई अवश्य कर लें।

2. किस्मों का चयन

अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी की दशा के अनुसार उपयुक्त किस्मों का चयन करें:

विशेषताप्रमुख उन्नत प्रजातियाँ
मध्य/देर से पकने वालीको.शा. 767, को.शा. 802, को.शा. 07250, को.शा. 7918, सीओएलके 8102
उत्तर-पूर्व/उत्तर मध्य भारतसीओ 0232, सीओ 0233
ठंड/पाला सहनशीलसीओ 16030 (करन एल 6)
सूखा/नमी तनाव सहनशीलसंकेश्वर 049, संकेश्वर 814, सीओबीआईएन 02173, सीओ 0212
बाढ़/जलमग्नता सहनशीलसंकेश्वर 049, संकेश्वर 814, गुजरात गन्ना 5/7, सीओएलके 09204 (इक्षु-3)
लवणता/क्षारीयता सहनशीलसंकेश्वर 814, सीओ 0212, दिव्यांशी-सीओएन 15071

3. पोषक तत्व प्रबंधन (बुआई के समय)

उर्वरक का प्रयोग हमेशा मृदा परीक्षण के आधार पर करना उचित है।

पोषक तत्वसामान्य मात्रा (कि.ग्रा./हैक्टर)प्रयोग विधि
नाइट्रोजन (N):300तीन भागों में विभाजित कर दें (टॉप ड्रेसिंग)
फॉस्फोरस (P):100625 कि.ग्रा. सुपर फॉस्फेट के रूप में नालियों में डालें
पोटाश (K):200नालियों में डालें और कुदाल से मिलाएं।

सूक्ष्म पोषक तत्व (कमी होने पर):

  • जिंक की कमी: 37.5 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट/हैक्टर डालें।
  • आयरन की कमी: 100 कि.ग्रा. फेरस सल्फेट/हैक्टर डालें।
  • सल्फर की कमी: उपज और रस की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 500 कि.ग्रा./हैक्टर जिप्सम के रूप में सल्फर का प्रयोग करें।

जैविक उपचार (बुआई के समय)

  • ट्राइकोडर्मा का प्रयोग: 20 कि.ग्रा. संवर्धित ट्राइकोडर्मा को 200 कि.ग्रा. गोबर की खाद या प्रेसमड के साथ मिलाकर नालियों में प्रयोग करें।
  • या, प्रेसमड केक 10 टन/हैक्टर (ट्राइकोडर्मा मिलाकर) गन्ना पंक्तियों में डालने से पेड़ी का फुटाव अच्छा होता है।

4. पेड़ी प्रबंधन (यदि कटाई हुई है)

पेड़ी (Ratoon) की अच्छी फसल लेने के लिए ये कार्य करें:

  • कटाई: गन्ने की कटाई जमीन की सतह से करें, ताकि फुटाव अच्छा हो।
  • जल्द फुटाव: कटाई के बाद जल्द फुटाव के लिए ठूंठों पर इथरेल (12 मि.ली./100 लीटर पानी) का छिड़काव करें।
  • उर्वरक: गन्ना (पेड़ी) पंक्तियों से सटाकर गहरी जुताई करें और संस्तुत उर्वरक (200 कि.ग्रा. यूरिया, 130 कि.ग्रा. डीएपी एवं 100 कि.ग्रा. पोटाश/हैक्टर) की मात्रा का प्रयोग करें।
  • सिंचाई: कटाई के एक सप्ताह बाद खेत में सिंचाई करें।

🐄 चारा फसलों का प्रबंधन: बरसीम और जई

नवंबर का महीना पशुओं के लिए हरे चारे की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु जई की बुआई और बरसीम की पहली कटाई के लिए महत्वपूर्ण है।

1. बरसीम (Egyptian Clover) का प्रबंधन

बुआई के बाद बरसीम को उचित सिंचाई की आवश्यकता होती है ताकि अच्छी बढ़वार हो सके।

  • शुरुआती सिंचाई: बुआई के बाद 2-3 सिंचाई एक-एक सप्ताह के अंतराल पर करें।
  • नियमित सिंचाई: इसके बाद, आवश्यकतानुसार, प्रत्येक 20-25 दिनों पर सिंचाई करते रहें।
  • पहली कटाई: बुआई के लगभग 45 दिनों के बाद पहली कटाई करें।
  • सिंचाई का समय: पहली या कोई भी चारा कटाई के बाद खेत में फिर से सिंचाई अवश्य करें

2. जई (Oat) की बुआई

नवंबर का पूरा महीना पशुओं के लिए पौष्टिक हरे चारे हेतु जई की बुआई के लिए सबसे उपयुक्त है।

  • बुआई का समय: नवंबर का पूरा महीना चारे हेतु जई बुआई के लिए अच्छा है।
  • बीज दर: एक हेक्टेयर के लिए 80-100 कि.ग्रा. बीज पर्याप्त है।
  • उन्नत किस्में: जई की केन्ट, यू.पी.ओ.-94, यू.पी.ओ.-212, क्लेमिंग गोल्ड आदि किस्में हरे चारे के लिए उपयुक्त हैं।
  • बीजोपचार: बुआई से पहले, बीज को ट्राइकोडर्मा 5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित कर बुआई करें।

सब्जियों की खेती (Vegetable Farming):

🥔 आलू (Potato) की खेती: नवंबर में बुआई, पोषण और सुरक्षा

नवंबर का महीना आलू की फसल के प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस समय बुआई को पूरा करना, सही पोषण देना और रोगों से बचाव करना अच्छी पैदावार की कुंजी है।

1. बुआई और पोषण प्रबंधन

  • बुआई पूरी करें: यदि आलू की बुआई अक्टूबर में न हो पाई हो, तो अब जल्दी पूरी कर लें।
  • सिंचाई: अक्टूबर में बोए गए आलू के खेत की सिंचाई करें।
  • टॉप ड्रेसिंग और मिट्टी चढ़ाना:
    • बुआई के 25-30 दिनों बाद, 90-100 कि.ग्रा. यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करें।
    • यूरिया डालने के तुरंत बाद मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए
  • बीज आलू का प्रबंधन: बीज के लिए लगाए गए आलू के खेत में दोबारा मिट्टी चढ़ाएँ
    • विषाणु रोग से बचाव: बीज वाले खेत में बार-बार न जाएँ, क्योंकि संपर्क से विषाणु रोग फैलने की आशंका रहती है।

2. आलू की उन्नत किस्में

अपनी आवश्यकता (सामान्य उपभोग, लाल छिलका या प्रसंस्करण) के अनुसार सही किस्म का चयन करें।

विशेषताप्रमुख उन्नत प्रजातियाँ
पछेती किस्मेंकुफरी सतलज, कुफरी आनंद, कुफरी अशोक, कुफरी बादशाह, कुफरी बहार।
लाल छिलके वालीकुफरी लालिमा, कुफरी सिंदूरी।
प्रसंस्करण (चिप्स/फ्रेंच फ्राई) हेतुकुफरी चिपसोना-1, कुफरी चिपसोना-2, कुफरी चिपसोना-3, कुफरी फ्राइसोना।
अन्य उन्नत किस्मेंकुफरी अलंकार, कुफरी अरुण, कुफरी चमत्कार, कुफरी देवा।
बायो-फोर्टिफाइडकुफरी जामुनिया (उच्च एंथोसायनिन/एंटीऑक्सीडेंट), कुफरी माणिक (उच्च आयरन और जिंक), कुफरी नीलकंठ (उच्च एंटीऑक्सीडेंट और कैरोटीनॉयड्स)।

3. पौध संरक्षण (झुलसा रोग)

आलू की फसल में अगेती और पछेती झुलसा रोग का प्रकोप हो सकता है, जो उपज को भारी नुकसान पहुँचाता है।

  • रोग से बचाव: झुलसा रोग से बचाव के लिए, इंडोफिल एम 45 या रिडोमिल एमजेड दवा के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 2-3 बार अवश्य करें
    • यह छिड़काव रोग के लक्षण दिखने की शुरुआत में ही करना चाहिए।

🍅 टमाटर (Tomato) की खेती: नवंबर में रोपाई और प्रबंधन

नवंबर का महीना रबी टमाटर की रोपाई और सही प्रबंधन के लिए आदर्श है। टमाटर गर्म मौसम की फसल है, इसलिए पाले से बचाव और संतुलित पोषण इसकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

1. जलवायु, मृदा और रोपाई

जलवायु और मृदा

  • बुआई/रोपाई का समय: अक्टूबर से नवंबर के अंत तक रबी टमाटर की बुआई या रोपाई की जा सकती है।
  • तापमान: 18 से 27 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त है, लेकिन यह फसल पाला सहन नहीं कर सकती
  • मृदा: उचित जल निकास वाली रेतीली दोमट (जैविक पदार्थ से भरपूर) या चिकनी काली कपासीय मृदा उपयुक्त होती है।

बीज दर और रोपाई की विधि

किस्मबीज दर (प्रति हेक्टेयर)
उन्नत किस्में350-400 ग्राम
संकर किस्में200-250 ग्राम
  • रोपाई का समय: रोपाई शाम के समय करें।
  • दूरी: पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60 सें.मी. और पौधे से पौधे की दूरी 45-60 सें.मी. रखते हुए रोपाई करें।

2. किस्मों का चयन और पोषण प्रबंधन

उन्नत किस्में

टमाटर की उन्नत प्रजातियों में पूसा दिव्या, पूसा गौरव, पूसा संकर 1, पूसा संकर 2 आदि उपयुक्त हैं।

पोषक तत्व प्रबंधन (प्रति हेक्टेयर)

किस्मनाइट्रोजन (N)फॉस्फोरस (P)पोटाश (K)
उन्नत प्रजातियाँ100 कि.ग्रा.60 कि.ग्रा.60 कि.ग्रा.
संकर प्रजातियाँ213 कि.ग्रा.240 कि.ग्रा.250 कि.ग्रा.
  • खाद देने में सावधानी: रोपाई के समय नाइट्रोजन देने के लिए यूरिया की जगह दूसरी मिश्रित खाद या अमोनियम सल्फेट का प्रयोग करें।
  • टॉप ड्रेसिंग: नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग के लिए आप यूरिया का प्रयोग कर सकते हैं।

3. पौध संरक्षण (झुलसा रोग)

टमाटर में झुलसा रोग उपज को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

  • नियंत्रण: झुलसा रोग का प्रकोप दिखाई देने पर बचाव के लिए मैकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

🧄 लहसुन (Garlic) की खेती: नवंबर में बुआई और पोषण प्रबंधन

नवंबर का महीना लहसुन की बुआई पूरी करने के लिए अंतिम और उपयुक्त समय होता है। सही विधि से बुआई, संतुलित पोषण और खरपतवार नियंत्रण अच्छी उपज के लिए आवश्यक हैं।

1. बुआई का समय और विधि

  • बुआई पूरी करें: यदि लहसुन की बुआई नहीं हुई हो, तो इस माह (नवंबर में) पूरी कर लें।
  • उपयुक्त प्रजाति: यमुना सफेद (जी-282) प्रजाति उपयुक्त मानी जाती है।
  • दूरी:
    • पंक्ति से पंक्ति की दूरी: 15 सें.मी.
    • पौधे से पौधे की दूरी: 10 सें.मी.
  • बुआई की विधि: लहसुन की कली (पत्ती) को 5-7.5 सें.मी. की गहराई पर, उसका नुकीला भाग ऊपर रखकर भूमि में बोते हैं।

2. पोषक तत्व प्रबंधन (प्रति हैक्टर)

लहसुन को अच्छी वृद्धि के लिए बुआई से पहले और बाद में संतुलित पोषण देना महत्वपूर्ण है।

बुआई से पहले (अंतिम जुताई के समय)

  • गोबर की खाद/कम्पोस्ट: 25-30 टन गोबर की खाद या 7-8 टन नाडेप कम्पोस्ट खेत की तैयारी के समय मिला दें।
  • उर्वरक: निम्नलिखित उर्वरक बुआई से पहले प्रयोग करें:
    • नाइट्रोजन (N): 35-40 कि.ग्रा.
    • फॉस्फेट (P): 50 कि.ग्रा.
    • पोटाश (K): 50 कि.ग्रा.

टॉप ड्रेसिंग

  • बुआई के 35-40 दिनों बाद, लगभग 74 कि.ग्रा. यूरिया की प्रथम टॉप ड्रेसिंग कर दें।

3. खरपतवार नियंत्रण

  • रासायनिक नियंत्रण: खरपतवार नियंत्रण के लिए, बुआई के तुरंत बाद प्रति हेक्टेयर 3-4 लीटर पेण्डीमेथिलीन का छिड़काव करना चाहिए। यह बुआई के बाद लेकिन अंकुरण से पहले करना सर्वोत्तम होता है।

पालक और मेथी की खेती: नवंबर में बुआई और संरक्षण

नवंबर का महीना पत्तेदार सब्जियों (पालक और मेथी) की बुआई और पिछली बुआई वाली फसलों के प्रबंधन के लिए उत्तम है। ये सब्जियाँ सर्दी के मौसम में अच्छी पैदावार देती हैं।

1. बुआई का समय और उन्नत किस्में

बुआई का समय

  • मैदानी क्षेत्रों में इन पत्तेदार सब्जियों की बुआई सितंबर से नवंबर तक की जा सकती है। नवंबर में बुआई पूरी कर लें।

उन्नत किस्में

फसलउन्नत प्रजातियाँ
पालक (Spinach)ऑलग्रीन, पूसा ज्योति, पूसा हरित, पूसा भारती, जोबनेर ग्रीन।
मेथी (Fenugreek)पूसा अर्ली बंचिंग, पूसा कस्तूरी।

2. प्रबंधन (अक्टूबर में बोई गई फसल के लिए)

  • निराई-गुड़ाई: अक्टूबर में बोई गई इन सब्जियों में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई अवश्य करें, ताकि खरपतवार नियंत्रित रहें और मिट्टी में हवा का संचार बना रहे।
  • सिंचाई: मौसम की नमी को ध्यान में रखते हुए ज़रूरत के अनुसार सिंचाई अवश्य करें।

3. पौध संरक्षण (सफेद रतुआ)

  • सफेद रतुआ (White Rust): पालक में यदि सफेद रतुआ के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत इसका नियंत्रण करें।
  • रासायनिक नियंत्रण: रिडोमिल एमजैड 72 या मैंकोजेब दवा का 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

🟢 सब्जी मटर की खेती: नवंबर में रोपण और प्रबंधन

सब्जी मटर (Garden Pea) की खेती के लिए नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त होता है। ठंडी जलवायु की आवश्यकता वाली इस फसल में, समय पर बुआई, सही पोषण और कीट नियंत्रण सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है।

1. जलवायु और बुआई का समय

  • जलवायु की आवश्यकता: सब्जी मटर के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है।
  • तापमान: बीज जमाव के लिए न्यूनतम 5°C और अधिकतम 22°C तापमान उपयुक्त है।
  • पाला: पाले का असर फूल तथा फल आने की अवस्था में अधिक होता है, इसलिए पाले से बचाव ज़रूरी है।
  • बुआई का समय: सब्जी मटर की बुआई नवंबर के प्रथम पखवाड़े तक (मध्य नवंबर) कर देनी चाहिए।

2. किस्मों का चयन, बीज दर और पोषण

उन्नत किस्में

बाज़ार की मांग और अपने क्षेत्र की अनुकूलता के अनुसार इन किस्मों का चयन करें:

  • पूसा प्रबल, आजाद पी-1, आजाद पी-3, आजाद पी-5, बोनविले, लिंकन, वी.एल.3, पंत उपहार, जवाहर मटर-1, काशी शक्ति, पालम प्रिया एवं अर्केल।

बुआई विधि और पोषण प्रबंधन

  • बीज दर (पछेती किस्मों के लिए): 80-100 कि.ग्रा. बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है।
  • बुआई की दूरी: बुआई 30 सें.मी. की दूरी पर पंक्तियों में करें।
  • बीज शोधन: बुआई से पूर्व बीज शोधन एवं बीजोपचार अवश्य करें
पोषक तत्वमात्रा (कि.ग्रा./हैक्टर)प्रयोग का समय
नाइट्रोजन (N)60बुआई के समय
फॉस्फेट (P)60बुआई के समय
पोटाश (K)30बुआई के समय

3. खरपतवार और कीट नियंत्रण

खरपतवार नियंत्रण

  • निराई-गुड़ाई: एक या दो हाथों से निराई करने से फसल की जड़ क्षेत्र में वायु संचार बढ़ जाता है और खरपतवार नियंत्रित होने से उत्पादन में वृद्धि होती है।
  • रासायनिक नियंत्रण: रसायनों द्वारा नियंत्रण हेतु पेण्डीमेथिलीन (स्टॉम्प) 2.5 से 3 लीटर प्रति हैक्टर की मात्रा को 500 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर बुआई के 1 से 3 दिनों के अंदर छिड़काव कर सकते हैं।

पौध संरक्षण (तनाछेदक)

  • नियंत्रण हेतु उपाय: तनाछेदक की रोकथाम हेतु बुआई के समय फोरेट 10 जी को 10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से बुआई के समय मिट्टी में मिला दें

🧅 रबी प्याज की खेती: नवंबर में पौधशाला और पोषण प्रबंधन

नवंबर का महीना रबी प्याज की सफल खेती के लिए पौधशाला तैयार करने और खेत में पोषक तत्वों का सही संतुलन बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1. पौधशाला लगाना और बुआई

बुआई का उपयुक्त समय

  • प्याज के बीज की बुआई का उपयुक्त समय मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर तक है। इस अवधि में रबी प्याज की फसल के लिए पौधशाला (नर्सरी) में बीज की बुआई करें।

बीज दर

  • प्रति हेक्टेयर खेत की रोपाई के लिए पौधशाला में 8-10 कि.ग्रा. बीज पर्याप्त होता है।

पौधशाला की तैयारी

  • प्याज की पौध भूमि की सतह से उभरी हुई क्यारियों में तैयार करनी चाहिए। यह जल निकास के लिए उत्तम है।

उन्नत प्रजातियाँ

  • रबी प्याज की अच्छी प्रजातियाँ हैं: एग्री फाउन्ड लाइट रेड, पूसा रेड, पूसा माधवी, पूसा रिद्धी, व्हाइट फ्लैट, पूसा व्हाइट राउंड

2. पोषक तत्व प्रबंधन (प्रति हेक्टेयर)

प्याज की अच्छी उपज के लिए, सभी उर्वरकों का प्रयोग बुआई से पहले अंतिम जुताई के समय करना चाहिए:

पोषक तत्वमात्रा (प्रति हैक्टर)प्रयोग का समय
गोबर की खाद20-25 टनअंतिम जुताई से पहले खेत में मिला दें।
नाइट्रोजन (N)60-70 कि.ग्रा.अंतिम जुताई के समय।
फॉस्फोरस (P)70 कि.ग्रा.अंतिम जुताई के समय।
पोटाश (K)60 कि.ग्रा.अंतिम जुताई के समय।

3. खरपतवार नियंत्रण

  • रासायनिक नियंत्रण: खरपतवार नियंत्रण हेतु स्टॉम्प (Pendythalin) का 3.5 लीटर प्रति हैक्टर की दर से घोल बनाकर रोपाई के बाद सिंचाई से पहले छिड़काव करें। यह खरपतवारों को उगने से पहले ही नियंत्रित कर देता है।

🥕 जड़ और मसाला फसलें

नवंबर का महीना मूली और गाजर जैसी जड़ वाली सब्जियों की बुआई और धनिया व जीरा जैसे मसालों की बुआई के लिए सबसे उत्तम है। इस समय की गई बुआई से रबी में अच्छी पैदावार मिलती है।

1. मूली (Radish) की बुआई और किस्में

मूली की बुआई अक्टूबर से दिसंबर तक की जा सकती है। नवंबर में तेज़ी से तैयार होने वाली किस्में लगाएँ।

विशेषतातैयारी का समयप्रमुख उन्नत प्रजातियाँ
शीघ्र तैयार होने वाली25-30 दिनव्हाइट आइसिकिल, रैपिड रेड, व्हाइट टिप्ड, पूसा मृदुला।
मध्यम समय40-45 दिनपूसा चेतकी, पूसा मृदुला, पूसा जामुनी, पूसा गुलाबी मूली, पूसा विधु, पालम हृदय।
देर से तैयार होने वाली55-60 दिनजापानी सफेद।

2. गाजर (Carrot) की बुआई और किस्में

  • बुआई का समय: नवंबर माह गाजर की बुआई के लिए उत्तम है।
  • उन्नत किस्में:
    • देसी (एशियाई) किस्में: पूसा रुधिरा, पूसा मेघाली, पूसा यमदग्नि, पूसा आसिता।
    • विदेशी (यूरोपियन) किस्में: चौंटनी, नैनटिस, चयन नं 223।

3. धनिया और जीरा की खेती

यह समय धनिया और जीरा दोनों की बुआई के लिए उचित है।

फसलउन्नत प्रजातियाँबीजोपचार
धनिया (Coriander)आर.सी.आर. 20, आर.सी.आर. 41, आर.सी.आर. 435, आर.सी.आर. 436।
जीरा (Cumin)आर.एस.-1, आर.जेड.-209, आर.जेड-223, जी.सी. 4, आर जेड-19।2 ग्रा. कार्बण्डाजिम या 6 ग्रा. ट्राइकोडर्मा प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें।

बुआई के बाद जल प्रबंधन

  • धनिया और जीरा की बुआई के तुरंत बाद फसल की हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
  • जीरे के लिए बीजोपचार अनिवार्य है ताकि बीजजनित रोगों से बचाव हो सके।

💜 शलजम (Turnip) की खेती: नवंबर में बुआई और विशेष पोषण

नवंबर का महीना शलजम की बुआई के लिए उपयुक्त है। शलजम एक जल्दी तैयार होने वाली, ठंडे मौसम की फसल है। इसकी अच्छी उपज के लिए बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन आवश्यक है।

1. बुआई का समय, विधि और किस्में

  • बुआई का समय: शलजम की बुआई अक्टूबर से दिसंबर तक की जा सकती है। नवंबर में इसे बोना बहुत लाभदायक है।
  • तैयारी का समय: यह लगभग 60-65 दिनों में तैयार हो जाती है।
  • उन्नत किस्में: पूसा स्वर्णिमा एवं पूसा चंद्रिमा प्रमुख किस्में हैं।
  • बुआई की विधि:
    • बुआई 45 सें.मी. दूर बनी मेड़ों पर करें।
    • बीज की गहराई 1.5 से 2 सें.मी. रखें।
    • पौधों के बीच 15-20 सें.मी. का अंतर बनाए रखें।

2. पोषक तत्व प्रबंधन (प्रति हेक्टेयर)

शलजम की अच्छी उपज के लिए, सभी उर्वरकों का प्रयोग बुआई से पहले अंतिम जुताई के समय करना चाहिए:

पोषक तत्वमात्राप्रयोग का समय
गोबर की खाद10-15 टनखेत की तैयारी के समय मिला दें।
नाइट्रोजन (N)50 कि.ग्रा.बुआई से पहले
फॉस्फेट (P)50 कि.ग्रा.बुआई से पहले
पोटाश (K)50 कि.ग्रा.बुआई से पहले

विशेष पोषण: बोरॉन का महत्व

  • शलजम में बोरॉन तत्व का प्रभाव काफी होता है।
  • इसकी कमी को दूर करने के लिए, बुआई के समय 20-30 कि.ग्रा. बोरैक्स प्रति हैक्टर की दर से मिट्टी में मिला दें।

3. जल और खरपतवार नियंत्रण

  • खरपतवार नियंत्रण (रासायनिक):
    • बुआई से पहले स्टॉम्प नामक खरपतवारनाशी 3 लीटर/हैक्टर की दर से छिड़कें।
    • इससे जड़ बनने की अवस्था तक खरपतवार नियंत्रित रहेंगे।
  • मिट्टी चढ़ाना: खरपतवार नियंत्रण के बाद पौधों को मिट्टी चढ़ाएँ
  • जल प्रबंधन: समय-समय पर सिंचाई करके खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें

🥬 फूलगोभी (Cauliflower) और बंदगोभी (Cabbage) की खेती: नवंबर में बुआई

नवंबर का महीना पछेती फूलगोभी और बंदगोभी (पत्तागोभी) की बुआई पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण है। ठंडे मौसम की ये फसलें, यदि समय पर लगाई जाएँ तो, अच्छी उपज देती हैं।

1. फूलगोभी (Cauliflower)

  • बुआई का समय: पछेती फूलगोभी की बुआई सितंबर से नवंबर तक की जा सकती है। नवंबर में बुआई का काम पूरा कर लेना चाहिए।
  • उन्नत किस्में: फूलगोभी की उन्नत किस्में हैं:
    • पूसा स्नोबॉल के-1
    • पूसा स्नोबॉल

2. बंदगोभी (Cabbage)

  • बुआई का समय: पछेती बंदगोभी की बुआई अक्टूबर से नवंबर तक की जा सकती है। यह समय रोपाई के लिए भी उपयुक्त होता है।
  • उन्नत किस्में: पछेती बंदगोभी की उन्नत किस्में हैं:
    • गोल्डन एकड़
    • पूसा मुक्ता
    • पूसा डूम हैंड
    • संकर किस्म केजीएमआर 1

ध्यान दें: इन फसलों की रोपाई आमतौर पर पौध तैयार होने के 4-6 सप्ताह बाद की जाती है। नवंबर में रोपाई करने से पहले खेत में पर्याप्त गोबर की खाद और बेसल खुराक (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) डालना सुनिश्चित करें।

🌳 फल वृक्षों का प्रबंधन: नवंबर माह के बागवानी कार्य

नवंबर का महीना बागों की सफाई, कीट नियंत्रण और पोषक तत्वों के प्रबंधन के लिए निर्णायक होता है। यहाँ प्रमुख फल वृक्षों के लिए आवश्यक कार्य दिए गए हैं।

1. आम (Mango)

  • बाग की सफाई: बाग की सफाई करें, निराई-गुड़ाई करके खरपतवार नष्ट कर दें।
  • अंतरफसल (Intercropping): नए लगे छोटे वृक्षों की पंक्तियों के बीच में मटर, मसूर एवं चना की बुआई अवश्य करें (रबी की फसल)।
  • मिलीबग नियंत्रण:
    • मिलीबग कीट के नियंत्रण हेतु तने और थाले के आसपास फॉलीडॉल धूल का बुरकाव करें।
    • तने के चारों ओर एल्काथिन की पट्टी लगाएँ, ताकि मिलीबग तने पर चढ़ न पाए।
  • थाले की सफाई: वृक्षों के थालों की सफाई कर दें।

2. अमरूद (Guava)

  • छाल खाने वाले कीट:
    • रोकथाम हेतु डाइक्लोरोवॉस 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर कीट के छेदों में भरकर चिकनी मिट्टी से लेप कर दें।
  • पत्ती खाने वाले कीट:
    • प्रकोप दिखाई देने पर मोनोक्रोटोफॉस या क्विनालफॉस दवा का 1.5 मि.ली. मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिनों के अंतराल पर 2 छिड़काव करें।

अमरूद की उन्नत खेती एवं प्रबंधन (Advanced cultivation and management of Guava)

3. पपीता (Papaya)

  • सिंचाई प्रबंधन: फल उत्पादन कम न हो, इसके लिए उचित सिंचाई ज़रूरी है।
    • जाड़े के दिनों में: 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।
    • फल लदे होने पर: जब वृक्ष फल से लदा हो, तो उस समय सिंचाई करना अति आवश्यक है।

4. आंवला (Amla)

  • जल प्रबंधन: आंवले के बाग में सिंचाई करें।
  • दीमक नियंत्रण: दीमक से बचाव हेतु फोरेट 10 जी 25-30 ग्राम प्रति पौधा डालकर मिट्टी में मिला दें।
  • फल सड़न (अल्टरनेरिया अल्टरनेटा): इसे प्रतिबंधित करने के लिए फल तोड़ने के 15 दिनों पूर्व 0.1 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करना चाहिए।
  • कटाई और विपणन: आंवले की तुड़ाई एवं विपणन (Marketing) की व्यवस्था करें।

5. अन्य फल वृक्ष

फल वृक्षप्रमुख कार्य
लीची (Litchi)जिन पूर्ण विकसित पौधों में फल लगना प्रारम्भ हो गया हो, उनमें फूल आने के 3-4 माह पूर्व पानी नहीं देना चाहिए (नवंबर से फरवरी)।
बेर (Ber)चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) से बचाने हेतु गंधकयुक्त दवा का 1.0 प्रतिशत छिड़काव करें।
केला (Banana)पोषण: प्रति पौधा 55 ग्राम यूरिया का प्रयोग करें। सिंचाई: 10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई}$ करें। रोग नियंत्रण (पर्ण धब्बा और सड़न): 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।

🌸 पुष्प एवं सगंधीय पौधों का प्रबंधन: नवंबर माह के कार्य

नवंबर का महीना फूलों की कटाई, नए पौधों को तैयार करने और रोपण के लिए महत्वपूर्ण है।

1. सिंचाई और देखभाल

  • ग्लैडियोलस: स्थानीय मौसम की नमी को देखते हुए सप्ताह में एक या दो बार सिंचाई करें।

2. रोपण और कटिंग

  • देसी गुलाब: अगले वर्ष के लिए स्टॉक (जड़ बनाने वाला पौधा) तैयार करने हेतु देसी गुलाब की कलम काटकर क्यारियों में लगा दें
  • कारनेशन (Carnation): कारनेशन के पौधों से कटिंग (कलम) लेकर जड़ें बनाने के लिए डालें
  • लिलीयम (Lilium): लिलीयम के बल्ब को अब खेतों में लगा दें

3. कटाई और बीज संग्रहण

  • गुलदाउदी (Chrysanthemum): गुलदाउदी में फूलों की तुड़ाई (कटाई) करें।
  • गेंदा (Marigold): गेंदे के पौधे से बीजों को एकत्रित करें (अगली बुआई के लिए)।

🐄 पशुपालन/दुग्ध विकास (Animal Husbandry/Dairy Development)

  • खीस खिलाना: नवजात संतति को खीस (Colostrum) अवश्य खिलाएँ। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • स्वच्छता: दूध दुहने से पहले थन को साफ पानी से धोएँ। दुहने वाला बर्तन और आस-पास का वातावरण भी स्वच्छ रखें ताकि दूध की गुणवत्ता बनी रहे।

🐔 मुर्गीपालन (Poultry Farming)

  • आहार: लेयर (अंडा देने वाली) मुर्गियों को लेयर फीड (संतुलित आहार) दें और साथ ही, अंडे के छिलके की मजबूती के लिए सीप (Shell Grit) का चूरा भी दें।
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