🌳जनवरी-फरवरी बागवानी गाइड: ठंड के संघर्ष से वसंत की सफलता तक का सफर

प्रकृति का श्रृंगार और बदलता मौसम

भारत विभिन्न ऋतुओं का देश है, जहां हर ऋतु धरा का श्रृंगार करती है। शीत ऋतु में जहाँ पर्वत श्रृंखलाएँ बर्फ की सफेद चादर ओढ़ लेती हैं, वहीं मैदानी भाग कोहरे से ढक जाते हैं। जैसे-जैसे हम वर्ष 2026 की ओर बढ़ रहे हैं, जलवायु परिवर्तन और मौसम के मिजाज को समझना हमारी आजीविका के लिए पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। जनवरी की शुष्क हवाओं और उत्तर-पश्चिमी विक्षोभ की हल्की वर्षा के बीच, यह समय पौधों के लिए धैर्य और तैयारी का है।

सांस्कृतिक और प्रेरणादायक जुड़ाव

जनवरी का मध्य भाग देशभर में संक्रांति, लोहड़ी, बिहू और पोंगल जैसे त्योहारों के साथ खरीफ की खुशियाँ लाता है। जिस प्रकार कड़ाके की ठंड के बाद फरवरी में वसंत का आगमन सुखद होता है, उसी प्रकार जीवन और बागवानी में भी संघर्ष के बाद ही सफलता का मीठा फल प्राप्त होता है। इसी सकारात्मक ऊर्जा के साथ हमें अपने बागों में तत्परता से जुटना चाहिए।

वैज्ञानिक महत्व: चिलिंग रिक्वायरमेंट (Chilling Requirement)

शीत ऋतु केवल आराम का समय नहीं है, बल्कि यह शीतोष्ण फलों (जैसे आड़ू, सेब, नाशपाती) के लिए जीवनदायी है।

  • द्रुतशीतन आवश्यकता: इन वृक्षों को एक निश्चित समय तक ठंड की आवश्यकता होती है।
  • प्रभाव: यदि चिलिंग रिक्वायरमेंट पूरी नहीं होती, तो कलिका फुटाव (Bud Burst) और फलन (Fruiting) बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

जनवरी-फरवरी के अनिवार्य बागवानी कार्य

इस द्विमाही (दो महीने की अवधि) में कई फल वृक्षों में पुष्पण (Flowering) की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। उच्च गुणवत्ता वाले फलों के उत्पादन के लिए निम्नलिखित कार्यों पर ध्यान देना आवश्यक है:

  • नवस्थापित बाग: नए पौधों की विशेष देखभाल, पाले से सुरक्षा और सिंचाई।
  • अंतःसस्यन (Intercropping): मुख्य पौधों के साथ उगाई गई फसलों का प्रबंधन।
  • मिट्टी का रखरखाव: नियमित निराई-गुड़ाई जिससे जड़ों को ऑक्सीजन मिल सके।
  • पोषण और सुरक्षा: संतुलित उर्वरक देना और कीट-रोग प्रबंधन की अग्रिम योजना बनाना।

आज बागों में किया गया कठोर श्रम ही भविष्य में सफलता के मीठे फल के रूप में हमें प्राप्त होगा। एक जागरूक बागवान वही है जो मौसम के मिजाज को समझकर अपने बगीचे की समचित देखभाल करे।

🥭आम के बाग का शीतकालीन प्रबंधन

आम के बागों की जनवरी-फरवरी में देखभाल: बौर सुरक्षा से पोषण तक

आम के बागवानों के लिए जनवरी और फरवरी के महीने “नींव” की तरह होते हैं। इस समय की गई एक छोटी सी चूक पूरे साल की फसल को प्रभावित कर सकती है।

1. पाले से सुरक्षा और छोटे पौधों की देखभाल

नर्सरी और नवस्थापित बागानों में पाले का खतरा सबसे अधिक होता है।

  • सुरक्षा चक्र: छोटे पौधों को पुआल या छप्पर से ढकें। ध्यान रहे कि दक्षिण-पूर्व दिशा को खुला छोड़ें ताकि सूर्य का प्रकाश और हवा मिलती रहे।
  • हल्की सिंचाई: मिट्टी का तापमान बनाए रखने के लिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करते रहें।

2. बौर प्रबंधन (Inflorescence Management)

जनवरी के पहले सप्ताह में निकलने वाले बौर अक्सर फल नहीं देते और गुच्छा रोग (Malformation) का रूप ले लेते हैं।

  • प्रो-टिप: ऐसे अगेती बौरों को तुरंत हटा दें ताकि बाद में आने वाले स्वस्थ बौरों को पूरा पोषण मिल सके।

3. उर्वरक और पोषण (Fertilizer Schedule)

फल आने से पहले पौधों को शक्ति देना आवश्यक है। प्रति वयस्क पौधा निम्नलिखित मात्रा का प्रयोग करें:

  • नाइट्रोजन: 500 ग्राम
  • फॉस्फोरस: 500 ग्राम}
  • पोटाश: 700 ग्रामउर्वरक देने के बाद हल्की सिंचाई अवश्य करें।

4. कीट नियंत्रण: मैंगो हॉपर (Mango Hopper)

फरवरी के अंत में जैसे ही तापमान बढ़ता है, ‘फुदका’ या ‘तेला’ कीट का प्रकोप शुरू हो जाता है। इसके नियंत्रण के लिए 0.3% इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें।

🍋नींबूवर्गीय बागों का प्रबंधन (Citrus Management)

सिट्रस (नींबूवर्गीय) बागवानी: जनवरी-फरवरी में रोपण से लेकर पोषण तक की पूरी जानकारी

नींबू, संतरा और मौसमी जैसे फलों की सफलता उनके शुरुआती प्रबंधन और समय पर की गई कांट-छांट पर निर्भर करती है। आइए जानते हैं इस द्विमाही के मुख्य कार्य:

1. नए बागों की स्थापना (New Plantation)

  • गड्ढों की तैयारी: फरवरी-मार्च में रोपण के लिए जनवरी में ही 1 घन मीटर के गड्ढे तैयार करें।
  • दूरी: दो गड्ढों के बीच 6-8 मीटर की दूरी रखें।
  • खाद का मिश्रण: प्रत्येक गड्ढे में 20-25 कि.ग्रा. गोबर की खाद और 1 कि.ग्रा. सुपर फॉस्फेट}$ मिलाएं।
  • दीमक नियंत्रण: गड्ढे भरते समय नीम की खली या क्लोरपायरीफॉस का प्रयोग अवश्य करें।

2. पोषण प्रबंधन (Nutrient Management)

पुराने फल देने वाले पौधों के लिए जनवरी-फरवरी में संतुलित खाद देना अनिवार्य है। प्रति पौधा निम्नलिखित मिश्रण दें:

  • 50 कि.ग्रा. गोबर की खाद
  • 400 \text{ ग्राम नाइट्रोजन
  • 200 ग्राम फॉस्फोरस
  • 400 ग्राम पोटाश

3. सिंचाई और पुष्पण (Flowering & Irrigation)

  • सावधानी: फरवरी में फूल आने से कुछ दिन पहले सिंचाई रोक दें, अन्यथा फूल समय से पहले झड़ सकते हैं।
  • फूल/फल झड़ने से बचाव: यदि फूल या छोटे फल अधिक गिर रहे हों, तो 2, 4-D (10 ग्राम/100 लीटर पानी}$) का छिड़काव करें।

4. कांट-छांट और कलिकायन (Pruning & Budding)

  • सफाई: तने को मजबूत बनाने के लिए जमीन से 50-60 सें.मी. ऊंचाई तक की छोटी शाखाओं को हटा दें।
  • बोर्डो लेप: कांट-छांट के बाद संक्रमण से बचाने के लिए कटे हुए हिस्सों पर बोर्डो लेप लगाएं।
  • कलिकायन: नए पौधे तैयार करने के लिए फरवरी का अंत बडिंग (Budding) के लिए सबसे उपयुक्त है।

🍌केले की बागवानी – जनवरी और फरवरी का प्रबंधन

केले की खेती: पाले से बचाव और फरवरी में रोपाई की वैज्ञानिक विधि

केले की फसल पाले और अत्यधिक ठंड के प्रति बहुत संवेदनशील होती है। उत्तर भारत के किसानों के लिए जनवरी में सुरक्षा और फरवरी में नए रोपण की योजना बनाना आवश्यक है।

1. जनवरी: पाले से सुरक्षा (Frost Management)

  • सिंचाई और धुआँ: पाले से बचाने के लिए जनवरी के पहले और तीसरे सप्ताह में सिंचाई करें। शाम के समय बाग में धुआँ करना और मल्चिंग सामग्री का उपयोग करना प्रभावी रहता है।
  • सहारा देना: फलों के भार और हवा से बचाने के लिए बांस के डंडों का सहारा (Propping) दें।

2. फरवरी: स्वच्छता और पोषण

  • पत्तियों का प्रबंधन: ठंड से सूखी और रोगग्रस्त पत्तियों को हटा दें। केवल एक स्वस्थ ‘तलवारी भूस्तारी’ (Sword Sucker) को छोड़कर बाकी अनावश्यक फुटाव को आधार से काट दें।
  • छिड़काव: नाइट्रोजन की 60 ग्राम मात्रा को 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

3. नए बागों का रोपण (New Plantation Strategy)

यदि सिंचाई उपलब्ध है, तो फरवरी रोपाई के लिए सर्वोत्तम है।

  • भूस्तारी का चयन: 3-5 माह पुराने, रोगमुक्त भूस्तारियों का चयन करें। (नेंद्रन/पूवन के लिए 1-1.5 कि.ग्रा. और लाल केले के लिए 1.5-2 कि.ग्रा. वजन)।
  • बीजोपचार (Treatment): * कीट नियंत्रण: जड़ों को क्लोरोपाइरीफॉस (2.5 मि.ली./ली.) के घोल में डुबोएं।
    • सूत्रकृमि: कार्बोफ्यूरॉन (50 ग्राम/पौधा) से उपचारित कर 72 घंटे छांव में सुखाएं।
    • फ्यूजेरियम म्लानि (Wilt): कार्बण्डाजिम (2 ग्राम/ली.) में 15-20 मिनट डुबोएं।

4. रोपाई की विधि

  • गड्ढे का आकार: 45 x 45 x 45 सें.मी. या 60 x 60 x 60 सें.मी.।
  • मिश्रण: 10 कि.ग्रा. गोबर की खाद और 250 ग्राम नीम की खली का प्रयोग करें। रोपाई गहरी न करें।

🍐अमरूद के बागों का कुशल प्रबंधन

अमरूद की खेती: सर्दियों की उच्च गुणवत्ता वाली फसल के लिए फरवरी में करें ये उपाय

अमरूद के बागवानों के लिए जनवरी-फरवरी का समय दोहरे लाभ का है—एक तरफ तैयार फलों की तुड़ाई और दूसरी तरफ अगली फसल की योजना।

1. फलों की तुड़ाई और पैकिंग (Harvesting Tips)

  • सही समय: फलों की तुड़ाई हमेशा सुबह के समय करें।
  • पहचान: जब फलों का रंग गाढ़े हरे से हल्का हरा होने लगे और हल्की सुगंध आने लगे, तब वे परिपक्व होते हैं।
  • पैकिंग: फलों को अखबार में लपेटकर बक्सों में रखें। इससे उनकी चमक बनी रहती है और वे आपस में रगड़कर खराब नहीं होते।

2. सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी (Micronutrient Deficiency)

यदि अमरूद की पत्तियों पर कत्थई रंग दिखाई दे, तो यह सूक्ष्म तत्वों की कमी है।

  • उपचार: कॉपर सल्फेट और जिंक सल्फेट के 0.4% घोल का छिड़काव करें। इससे पौधों का स्वास्थ्य और फलों का आकार सुधरता है।

3. फसल नियमन (Crop Regulation/Bahar Treatment)

वर्षा ऋतु की गुणवत्ताहीन फसल की जगह सर्दियों की मीठी फसल लेने के लिए:

  • फूल गिराना: फरवरी में आने वाले फूलों को तोड़ दें या NAA (100 PPM) का छिड़काव करें।
  • सिंचाई: इस समय सिंचाई कम कर दें ताकि गर्मियों में अधिक फूल आ सकें।

4. छंटाई (Pruning Strategy)

फरवरी के दूसरे पखवाड़े से मार्च के पहले सप्ताह तक छंटाई पूरी कर लें:

  • पिछली शाखाओं के 10-15 सें.मी. अग्र भाग को काटें।
  • सुरक्षा: कटे हुए हिस्सों पर बोर्डो पेस्ट या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (2-3%) का लेप लगाएं।

🍇अंगूर के बाग का वार्षिक कायाकल्प

अंगूर की सफल खेती: जनवरी में काट-छांट और फरवरी में रोगों से सुरक्षा का वैज्ञानिक तरीका

अंगूर की पैदावार पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आपने जनवरी में उसकी काट-छांट किस प्रकार की है। चूंकि अंगूर के गुच्छे हमेशा नई टहनियों पर लगते हैं, इसलिए पुरानी शाखाओं का प्रबंधन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।

1. वार्षिक काट-छांट (Annual Pruning Strategy)

काट-छांट से 15 दिन पहले एथेफोन का छिड़काव करें ताकि पत्तियां गिर जाएं। किस्म के अनुसार कलिकाओं (Buds) की संख्या इस प्रकार रखें:

  • ब्यूटी सीडलेस: 2-3 कलिकाएं।
  • परलेट: 3-4 कलिकाएं।
  • पूसा उर्वशी/नवरंग: 4-6 कलिकाएं।
  • पूसा/थॉमसन सीडलेस: 9-12 कलिकाएं।

2. फुटाव के लिए विशेष उपचार

काट-छांट के बाद कलियों के एकसमान फुटाव के लिए हाइड्रोजन साइनामाइड (डोर्मेक्स) या 2% थायो यूरिया का प्रयोग करें। कटे हुए हिस्सों पर रोगों से बचाव हेतु 1% बोर्डो मिश्रण लगाना न भूलें।

3. पोषण और मृदा उपचार

वयस्क पौधों (5 वर्ष+) के लिए संतुलित खाद की मात्रा:

  • गोबर खाद + 500g नाइट्रोजन + 300g फॉस्फोरस + 400g पोटाश। फॉस्फोरस की पूरी और नाइट्रोजन/पोटाश की आधी मात्रा काट-छांट के तुरंत बाद सिंचाई के साथ दें।

4. कीट एवं रोग प्रबंधन

  • जैविक उपचार: मिली बग और थ्रिप्स के लिए मिट्टी में मेटारिजियम और ब्युवेरिया का प्रयोग करें।
  • रोग सुरक्षा: फरवरी में चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) से बचाव हेतु केराथेन (0.1%) या ट्राइकोडर्मा का छिड़काव करें।

5. नई पौध तैयार करना

कटी हुई स्वस्थ शाखाओं से 30-40 सेमी लंबी कलमें बनाएं। उन्हें IBA (500-1000 PPM) से उपचारित कर पौधशाला में लगाएं।

🍎अनार की बागवानी – जनवरी और फरवरी का प्रबंधन

शीर्षक: अनार की उन्नत खेती: जनवरी में नई पौध और ‘मृग बहार’ की फसल का प्रबंधन

अनार एक ऐसी फसल है जिसे सही समय पर पोषण और कीट नियंत्रण की आवश्यकता होती है। जनवरी और फरवरी के महीने अनार के नए पौधों को तैयार करने और पुरानी फसल की तुड़ाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

1. वेज ग्राफ्टिंग (Wedge Grafting): नई पौध तैयार करना

अनार के नए पौधे तैयार करने के लिए जनवरी-फरवरी का समय सबसे सफल माना जाता है।

  • सफलता की दर: वेज ग्राफ्टिंग विधि अपनाकर आप 90% तक सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
  • रोपण: यदि सिंचाई उपलब्ध है, तो फरवरी में नए बागों की स्थापना की जा सकती है। रोपण से पहले पौधों पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (2.5 ग्राम/ली.) का छिड़काव अवश्य करें।

2. फसल प्रबंधन (Crop Management)

  • मृग बहार की फसल लेने पर: जनवरी में फलों की तुड़ाई कर उन्हें बाजार भेजें।
  • तुड़ाई के बाद: मध्यम से गहरी छंटाई (Pruning) करें। रोगग्रस्त और उलझी शाखाओं को हटाकर मोटे सिरों पर 10% बोर्डो लेप लगाएं।
  • हस्त बहार की फसल में: इस समय शाखाओं पर फलों का भार अधिक होता है, इसलिए उन्हें लकड़ी का सहारा दें। फलों के विकास के लिए मोनो पोटेशियम फॉस्फेट (0:52:34) और मैग्नीज सल्फेट (5-6 ग्राम/ली.) का छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर करें।

3. कीट एवं रोग प्रबंधन

  • सुषुप्तावस्था (Dormancy): जनवरी में पौधों पर बोर्डो मिश्रण या ब्रोन्योल का छिड़काव करें।
  • फल मक्खी (Fruit Fly): अनार की सबसे बड़ी दुश्मन फल मक्खी से बचाव के लिए प्रति हेक्टेयर 12 मैकफेल ट्रैप या टोरुला यीस्ट ल्यूर लगाएं।

🌳लीची के बाग का जनवरी-फरवरी प्रबंधन

लीची की खेती: बंपर पैदावार के लिए पुष्पण (Flowering) से पहले करें ये जरूरी काम

लीची की मिठास और गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि फूल आने के समय बाग का प्रबंधन कैसा है। जनवरी-फरवरी का समय पाले से बचाव और आने वाले बौर (Flowers) की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

1. पाले से सुरक्षा (Frost Protection)

जनवरी की कड़ाके की ठंड लीची के नए पौधों के लिए घातक हो सकती है।

  • उपाय: पौधों को पुआल से ढकें और मिट्टी का तापमान बनाए रखने के लिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करें।

2. पुष्पण और सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Strategy)

फरवरी में लीची के पौधों में फूल आने लगते हैं। इस समय सिंचाई का प्रबंधन बहुत नाजुक होता है:

  • सावधानी: फूल आने के समय सिंचाई बिल्कुल न करें, अन्यथा फूल झड़ने की समस्या हो सकती है।
  • नियम: फूल आने से पहले और फल बैठने के बाद सिंचाई की समुचित व्यवस्था रखें।

3. कीट एवं रोग नियंत्रण

  • फुदका कीट (Hopper): बौर आने के समय फुदका कीट का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए इमिडाक्लोप्रिड (0.7-1.0 मि.ली./ली.) या थायोमेथोक्साम का छिड़काव करें।
  • चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew): इस रोग से बचाव के लिए कवकनाशी का प्रयोग करें ताकि बौर स्वस्थ रहें।

4. खाद और पोषण (Fertilization)

फरवरी माह लीची के पौधों को ताकत देने का समय है:

  • कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN): इसकी आधी मात्रा यानी लगभग 1.5 कि.ग्रा. प्रति पौधा फरवरी में मिट्टी में मिलाकर दें।

🌳आंवला बागवानी प्रबंधन (जनवरी-फरवरी)

आंवला की उन्नत खेती: तुड़ाई के समय प्रबंधन और पुष्पण (Flowering) के लिए विशेष सावधानी

उत्तरी भारत में आंवला न केवल एक फल है, बल्कि यह आयुर्वेद और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार भी है। जनवरी-फरवरी का समय आंवले की तुड़ाई और नए बागों की नींव रखने के लिए सर्वोत्तम है।

1. फल तुड़ाई और शाखा सुरक्षा (Harvesting & Support)

  • सहारा देना: इस समय वृक्ष फलों के बोझ से लदे होते हैं। शाखाओं को टूटने से बचाने के लिए बांस-बल्ली का सहारा अवश्य दें।
  • सिंचाई नियम: तुड़ाई से 15 दिन पहले सिंचाई रोक दें। इससे फल अच्छी तरह तैयार होते हैं और उनकी भंडारण क्षमता बढ़ती है।

2. पाले से सुरक्षा (Protection from Frost)

कड़ाके की ठंड और पाला आंवले के वृक्षों को नुकसान पहुँचा सकता है।

  • उपाय: पाले से बचाव के लिए गंधक के अम्ल (0.1%) का पूरे वृक्ष पर छिड़काव करें। जरूरत पड़ने पर इसे दोबारा दोहराया जा सकता है।

3. पोषण एवं खाद प्रबंधन (Nutrient Management)

जनवरी माह में पौधों की आयु के अनुसार संतुलित खाद देना चाहिए:

  • 1 वर्ष का पौधा: 10kg गोबर खाद, 100g नाइट्रोजन, 50g फॉस्फेट, 75g पोटाश।
  • 10 वर्ष+ का पौधा: 100kg गोबर खाद, 1kg नाइट्रोजन, 500g फॉस्फेट, 750g पोटाश।
  • विधि: फॉस्फोरस की पूरी और नाइट्रोजन/पोटाश की आधी मात्रा का प्रयोग इसी समय करें।

4. पुष्पण और सिंचाई (Flowering & Irrigation)

  • सावधानी: फरवरी में आंवले में फूल आने का समय होता है। फूल आने के समय सिंचाई बिल्कुल न करें, अन्यथा फूल झड़ने की समस्या हो सकती है।
  • नया रोपण: यदि सिंचाई उपलब्ध है, तो फरवरी के दूसरे पखवाड़े से नए पौधों का रोपण शुरू करें।

🌱बेर की बागवानी और तुड़ाई प्रबंधन

बेर की खेती: फरवरी में ‘चूर्णिल आसिता’ से सुरक्षा और तुड़ाई के स्मार्ट तरीके

बेर को “गरीबों का सेब” कहा जाता है और जनवरी-फरवरी में इसकी अगेती किस्में बाजार में अपनी जगह बनाने लगती हैं। इस समय फल की गुणवत्ता और पौधों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

1. रोगों से सुरक्षा: चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew)

फरवरी के महीने में तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बेर में चूर्णिल आसिता रोग का खतरा बढ़ जाता है।

  • उपचार: इससे बचाव के लिए $0.2\%$ केराथेन (Karathane) का छिड़काव करें।
  • अंतराल: बेहतर सुरक्षा के लिए इस छिड़काव को 15 दिनों के बाद दोबारा दोहराएं।

2. फलों की तुड़ाई का सही समय (Harvesting)

  • समय: फलों की तुड़ाई हमेशा सुबह या शाम के समय करें। चिलचिलाती धूप में तुड़ाई करने से फलों की चमक और नमी कम हो जाती है।
  • श्रेणीकरण: तुड़ाई के बाद फलों को उनके रंग और आकार के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों (Grading) में बांटें। इससे बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।

3. पैकिंग और परिवहन (Packing)

फलों को सुरक्षित बाजार पहुँचाने के लिए निम्नलिखित का उपयोग किया जा सकता है:

  • जूट के बोरे, नायलॉन की जालीदार थैलियाँ, बांस की टोकरियाँ या गत्ते के डिब्बे।

4. नया रोपण (New Plantation)

यदि आप बेर का नया बाग लगाना चाहते हैं, तो फरवरी का अंत इसके लिए सबसे उपयुक्त समय है।

🍈बेल (Bael) की बागवानी और तुड़ाई प्रबंधन

बेल की खेती: फरवरी में पुष्पण की तैयारी और तुड़ाई के समय बरतें ये सावधानियां

बेल का फल अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। फरवरी का महीना बेल के बागवानों के लिए दोहरा महत्व रखता है—जहाँ एक तरफ नए फूलों का स्वागत होता है, वहीं दूसरी तरफ तैयार फलों की तुड़ाई का समय होता है।

1. पुष्पण और स्वच्छता (Flowering & Cleanliness)

  • समय: सामान्यतः फरवरी में बेल में पुष्पण (Flowering) की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
  • प्रबंधन: फूलों के बेहतर विकास के लिए पौधों के थालों (Basins) की अच्छी तरह सफाई करें और उन्हें खरपतवार मुक्त रखें। इससे पोषक तत्व सीधे पौधों को मिलते हैं।

2. तुड़ाई का सही समय और संकेत (Harvesting Indicators)

अर्धशुष्क और वर्षा आधारित क्षेत्रों में बेल के फल फरवरी के अंत तक पकने लगते हैं।

  • पहचान: जब फलों का रंग गहरे हरे से बदलकर पीला-हरा होने लगे, तब वे तुड़ाई के लिए तैयार होते हैं।
  • तकनीक: फलों को हमेशा 2 सें.मी. डंठल के साथ ही तोड़ें। इससे फल लंबे समय तक ताजा रहते हैं।

3. तुड़ाई के दौरान सावधानी (Handling Strategy)

बेल की तुड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फल जमीन पर नहीं गिरना चाहिए

  • प्रभाव: जमीन पर गिरने से फल की त्वचा पर सूक्ष्म दरारें आ जाती हैं। भंडारण के समय इन्हीं प्रभावित भागों से सड़न (Rotting) शुरू हो जाती है, जिससे पूरा फल खराब हो जाता है।
Scroll to Top